अब कैसे बताऊं उन लम्हों को याद कर भींगती मेरे आंगन की मिट्टी है! अब कैसे बताऊं उन लम्हों को याद कर भींगती मेरे आंगन की मिट्टी है!
वो सुनहरे दिन वो सुनहरे दिन
किताब के उन पन्नों से आज फिर मुलाकात हुई.. किताब के उन पन्नों से आज फिर मुलाकात हुई..
चंद लम्हे... सब कुछ होते है वही याद साथ सब होता है चंद लम्हे... सब कुछ होते है वही याद साथ सब होता है
लम्हे जिदंगी के जिओ जैसे उड़ती है तितलियाँ जीवन बहुत छोटा है भूल जाओ सारी गलतियाँ लम्हे जिदंगी के जिओ जैसे उड़ती है तितलियाँ जीवन बहुत छोटा है भूल जाओ...